कोल्ड प्रेस्ड तेल और रिफाइंड तेल: एक के बाद एक हर कदम पर क्या होता है?

अगर आप दो बोतलें सामने रखें, एक में कोल्ड प्रेस्ड मूंगफली तेल, दूसरी में रिफाइंड मूंगफली तेल, और किसी को बताएं नहीं कि कौन-सी कौन-सी है, तो वो खुद बता देगा। एक का रंग गहरा सुनहरा है, दूसरी लगभग पानी जैसी पारदर्शी है। एक को सूँघने पर मूंगफली की महक आती है, दूसरी में कोई गंध नहीं।

यह फर्क कहाँ से आता है? दोनों एक ही बीज से शुरू होते हैं। फर्क पूरी तरह प्रक्रिया में है, और वो प्रक्रिया क्या है, इसे समझना ज़रूरी है।

कोल्ड प्रेस्ड तेल और रिफाइंड तेल में क्या अंतर है? पूरी प्रक्रिया समझें

शुरुआत: दोनों एक ही बीज से

कोल्ड प्रेस्ड हो या रिफाइंड, कच्चा माल एक ही है। मूंगफली, तिल, सरसों, नारियल, सब वही बीज जो खेत से आए।

लेकिन जैसे ही बीज कारखाने की दहलीज़ पार करता है, रास्ते अलग हो जाते हैं।

पहला कदम: बीज को गर्म करना (सिर्फ रिफाइंड में)

बड़े कारखानों में बीजों को पहले साफ किया जाता है, फिर 60–80°C तक गर्म किया जाता है। यह इसलिए किया जाता है ताकि बीज की कोशिकाएं खुल जाएं और ज़्यादा तेल निकले।

लेकिन इस गर्मी का एक नुकसान भी है, बीज की खुशबू के लिए ज़िम्मेदार जो हल्के वाष्पशील यौगिक होते हैं, वो इसी तापमान पर उड़ने लगते हैं। तेल निकलने से पहले ही उसका स्वाद कमज़ोर होना शुरू हो जाता है।

कोल्ड प्रेस्ड प्रक्रिया में बीज को कभी गर्म नहीं किया जाता। वो सीधे कोल्हू में जाता है, जैसा खेत से आया।

दूसरा कदम: तेल निकालना

कोल्ड प्रेस्ड तरीके में बीज को धीमी गति से चलने वाले कोल्हू में डाला जाता है। लकड़ी का कोल्हू हो या कम RPM पर चलने वाली मशीन, मकसद एक ही है: धीरे-धीरे दबाव डालो ताकि घर्षण से गर्मी न बने। जो तेल निकलता है वो छाना जाता है और सीधे बोतल में भर दिया जाता है।

रिफाइंड तरीके में मशीन के दबाव के बाद भी बीज में 10–14% तेल बचा रहता है। इसे बर्बाद नहीं जाने देते। इसके लिए हेक्सेन, एक पेट्रोलियम-आधारित रसायन, बीज के बचे हुए टुकड़ों पर डाला जाता है। हेक्सेन तेल को घोल लेता है, फिर उस मिश्रण को गर्म करके हेक्सेन उड़ाया जाता है।

FSSAI के नियमों के अनुसार, रिफाइंड तेल में हेक्सेन की अनुमत मात्रा तय है और यह मात्रा सुरक्षित मानी जाती है। लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि प्रक्रिया में एक पेट्रोकेमिकल शामिल है जो कोल्ड प्रेस्ड तेल को कभी छूता भी नहीं।

तीसरा कदम: रिफाइनिंग के छह चरण

हेक्सेन से निकाले गए कच्चे तेल में तेज़ गंध, गहरा रंग और कई यौगिक होते हैं जो व्यावसायिक उपयोग के लिए ‘ठीक’ नहीं माने जाते। इसलिए उसे ‘साफ’ किया जाता है, और यह सफाई छह अलग-अलग चरणों में होती है:

1. डीगमिंग (Degumming)

पानी या एसिड से फॉस्फोलिपिड हटाए जाते हैं। ये फॉस्फोलिपिड, जिनमें लेसिथिन भी शामिल है, बीज में प्राकृतिक रूप से होते हैं। इन्हें हटाने से तेल साफ दिखने लगता है। कोल्ड प्रेस्ड तेल में ये मौजूद रहते हैं, इसीलिए वो कभी-कभी थोड़ा धुंधला दिखता है।

2. न्यूट्रलाइज़ेशन (Neutralisation)

सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH, यानी कास्टिक सोडा) से मुक्त फैटी एसिड हटाए जाते हैं। इसमें एक साबुन जैसा पदार्थ बनता है जिसे अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया में तेल का कुछ प्राकृतिक स्वाद भी चला जाता है।

3. ब्लीचिंग (Bleaching)

सक्रिय मिट्टी (activated clay) या चारकोल से तेल का रंग हटाया जाता है। मूंगफली तेल का सुनहरा रंग, तिल तेल का हल्का भूरा रंग, ये प्राकृतिक कैरोटेनॉयड से आते हैं। ब्लीचिंग इन्हें सोख लेती है। रंग हटाना इसलिए ज़रूरी होता है ताकि हर बोतल एक जैसी दिखे।

4. डीवैक्सिंग (Dewaxing)

कुछ तेलों में, खासकर सूरजमुखी तेल में, बीज के छिलके से मोम आ जाता है। इसे ठंडा करके क्रिस्टलाइज़ किया जाता है और फिर छाना जाता है।

5. डिओडराइज़िंग (Deodorising)

यह सबसे बड़ा चरण है, और सबसे ज़्यादा बदलाव करने वाला।

तेल को 200–270°C के वैक्यूम चैंबर में भाप से गुज़ारा जाता है। इसका मकसद है तेल की सारी गंध हटाना। सरसों की तीखी महक, तिल की मीठी खुशबू, नारियल की पहचान, सब यहाँ ख़त्म हो जाती है।

यही वो कदम है जिसकी वजह से रिफाइंड तेल का कोई स्वाद नहीं होता। और यही वो कदम है जो हमें सबसे ज़्यादा दुखी करता है, क्योंकि खुशबू के साथ तेल की पहचान भी चली जाती है।

6. कृत्रिम एंटीऑक्सिडेंट डालना

रिफाइनिंग में बीज के प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट (टोकोफेरॉल, पॉलीफेनॉल) भी हट जाते हैं। अब तेल को लंबे समय तक ताज़ा रखने के लिए TBHQ, BHA, BHT जैसे कृत्रिम एंटीऑक्सिडेंट डाले जाते हैं। FSSAI ने इनकी एक सीमा तय की है और यह अनुमत है, लेकिन यह एक कृत्रिम विकल्प है उस चीज़ का जो प्रकृति ने बीज में पहले से डाली थी।

इन छह प्रक्रियाओं के बाद क्या बचता है?

फैटी एसिड। बस।

ट्राइग्लिसराइड की संरचना काफी हद तक वैसी ही रहती है। इसीलिए न्यूट्रिशन लेबल पर कोल्ड प्रेस्ड और रिफाइंड तेल की फैट सामग्री लगभग एक जैसी दिखती है। लेकिन वो सारे यौगिक जो तेल को एक बीज से दूसरे बीज से अलग बनाते थे, उनके स्वाद, खुशबू, प्राकृतिक स्थिरता और पोषण तत्व, वो सब रिफाइनिंग में बह जाते हैं।

रिफाइंड तेल एक प्रकार से साफ पानी है जिसमें सिर्फ कैलोरी है। कोल्ड प्रेस्ड तेल वो असली बीज है जो तरल रूप में आपकी थाली तक पहुँचा है।

घर पर खुद परखें

अगर आपके पास दोनों तरह के तेल हों, तो यह आज़माएं: दोनों बोतलों को खिड़की की रोशनी में रखें। कोल्ड प्रेस्ड में रंग होगा, गहरा, जीवंत। रिफाइंड लगभग पारदर्शी होगा। दोनों की बोतल सूँघें। कोल्ड प्रेस्ड तेल से बीज की खुशबू आएगी। रिफाइंड में कोई गंध नहीं।

यही संवेदी अनुभव इस बात का प्रमाण है कि रिफाइनिंग ने क्या हटाया।

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और पढ़ें

  • कोल्ड प्रेस्ड तेल क्या होता है? [→ ब्लॉग 1]
  • खाने के तेल का लेबल कैसे पढ़ें [→ ब्लॉग 7]
  • तेल निकालने की विधि खाने को कैसे प्रभावित करती है [→ ब्लॉग 5]
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