कोल्ड प्रेस्ड तेल क्या होता है? सबसे सरल जवाब

आपकी दादी या नानी के घर में एक बड़ा-सा लकड़ी का कोल्हू होता था। या फिर पास के बाज़ार में एक कोल्हू वाला था, जहाँ से घर का तेल आता था। वो तेल जो डिब्बे में भरा जाता था, उसकी महक ही अलग होती थी। मूंगफली का तेल होता था तो उसमें मूंगफली की खुशबू आती थी। सरसों का तेल होता था तो पूरी रसोई में वो तीखी, सुखद गंध फैल जाती थी।

फिर बाज़ार में चमकीली बोतलों में रिफाइंड तेल आया। सस्ता, बिना गंध का, साफ और पारदर्शी। धीरे-धीरे कोल्हू वाला तेल पुरानी बात लगने लगी।

आज जो लोग ‘कोल्ड प्रेस्ड तेल’ खोज रहे हैं, वो दरअसल उसी पुराने तेल को ढूंढ रहे हैं, बस नए नाम के साथ। तो समझते हैं कि कोल्ड प्रेस्ड तेल होता क्या है, और इसे ‘कोल्ड प्रेस्ड’ क्यों कहते हैं।

कोल्ड प्रेस्ड तेल की विशेषताएँ

बीज में तेल कैसे बंद होता है?

मूंगफली, तिल, नारियल, सरसों, इन सबके अंदर तेल होता है। यह तेल बीज की कोशिकाओं में बंद होता है, जिन्हें ‘स्फेरोसोम’ कहते हैं, छोटे-छोटे तेल के थैले जो बीज के अंदर होते हैं। इन्हें खोलने के लिए दबाव चाहिए।

सवाल यह है कि वो दबाव कैसे दिया जाए, धीरे-धीरे और ठंडा, या तेज़ और गर्म।

कोल्ड प्रेस्ड तेल में जवाब है: धीरे-धीरे, बिना गर्मी के।

एक पारंपरिक कोल्हू में, जिसे उत्तर भारत में ‘घाणी’ या ‘कोल्हू’, तमिलनाडु में ‘चेक्कू’, आंध्र-तेलंगाना में ‘गानुगा’ कहते हैं, बीज को एक लकड़ी के चक्के से धीरे-धीरे पीसा जाता है। इस रफ्तार में घर्षण से जो गर्मी बनती है, वो बहुत कम होती है। तापमान 40–45°C से ऊपर नहीं जाता। और इसी तापमान की सीमा में बीज के अंदर के सारे प्राकृतिक तत्व, उसकी खुशबू, उसके टोकोफेरॉल (विटामिन E का प्राकृतिक रूप), उसके पॉलीफेनॉल, तेल के साथ निकल आते हैं।

यही कोल्ड प्रेस्ड तेल है।

रिफाइंड तेल में क्या होता है जो यहाँ नहीं होता?

बड़े कारखानों में तेल निकालने की प्रक्रिया बिल्कुल अलग है। वहाँ लक्ष्य है ज़्यादा से ज़्यादा तेल निकालना, जल्दी से।

पहले बीजों को 60–80°C पर गर्म किया जाता है। फिर मशीन से दबाया जाता है। इस प्रक्रिया में जो तेल निकलता है उसे ‘कच्चा तेल’ कहते हैं, और यह कच्चा तेल काफी गहरे रंग का, तेज गंध वाला होता है।

इसके बाद बीज के बचे हुए टुकड़ों में अभी भी 10–14% तेल होता है। उसे निकालने के लिए हेक्सेन नाम का रासायनिक सॉल्वेंट इस्तेमाल होता है, जो पेट्रोलियम से बनता है। यह सॉल्वेंट बचे हुए तेल को घोल लेता है। फिर गर्म करके सॉल्वेंट को उड़ाया जाता है।

इसके बाद कच्चे तेल को ‘साफ’ करने के लिए कई प्रक्रियाएं होती हैं, डीगमिंग, ब्लीचिंग, डिओडराइज़िंग। अंत में जो तेल मिलता है वो पारदर्शी, बेरंग और बेगंध होता है, लेकिन उसमें बीज का स्वाद, गंध और प्राकृतिक पोषण बहुत कम बचता है।

कोल्ड प्रेस्ड तेल में इनमें से कोई भी प्रक्रिया नहीं होती। बीज दबाया, तेल छाना, बोतल में भरा, बस।

बोतल में रंग क्यों होता है?

अगर आप पहली बार हमारा कोल्ड प्रेस्ड मूंगफली तेल खोलें, तो आप देखेंगे कि उसका रंग सुनहरा-भूरा है, हल्के पीले रंग का नहीं जैसा रिफाइंड तेल होता है।

यह रंग मूंगफली में मौजूद प्राकृतिक कैरोटेनॉयड से आता है। रिफाइंड तेल में ब्लीचिंग प्रक्रिया में इन्हें जानबूझकर हटाया जाता है, क्योंकि हर बोतल का रंग एक जैसा दिखना ज़रूरी होता है।

उसी तरह, कोल्ड प्रेस्ड सरसों तेल में वो तेज खुशबू है जो आपकी नानी के हाथ के अचार की याद दिलाती है। कोल्ड प्रेस्ड तिल तेल में वो गर्म, मीठी महक है जो दक्षिण भारतीय रसोई की पहचान है। यह गंध सिर्फ स्वाद नहीं है, यह इस बात की निशानी है कि तेल असली है।

ज़्यादा महंगा क्यों होता है?

यह सवाल हर कोई पूछता है, और जवाब बिल्कुल सीधा है।

कोल्ड प्रेस्ड तरीके से 1 किलो मूंगफली से लगभग 350–400 मिलीलीटर तेल निकलता है। रिफाइंड तरीके से, जहाँ गर्मी और हेक्सेन दोनों का इस्तेमाल होता है, उसी 1 किलो से 450–500 मिलीलीटर या उससे ज़्यादा तेल निकाला जा सकता है।

कम मात्रा, ज़्यादा समय, कोई रासायनिक शॉर्टकट नहीं, इसीलिए कोल्ड प्रेस्ड तेल महंगा होता है। आप जो अतिरिक्त पैसे देते हैं, वो किसी ब्रांड नाम के लिए नहीं, उस प्रक्रिया के लिए हैं जो तेल को असली रखती है।

शेल्फ लाइफ: एक सच्ची बात

रिफाइंड तेल ज़्यादा दिन चलता है, यह सच है। क्योंकि उसमें से वो तत्व हटा दिए गए हैं जो समय के साथ खराब होते हैं, और उनकी जगह TBHQ जैसे कृत्रिम एंटीऑक्सिडेंट डाले जाते हैं।

कोल्ड प्रेस्ड तेल बिना खोले 9–12 महीने तक अच्छा रहता है। खोलने के बाद 3–4 महीने में इस्तेमाल कर लें। इसे ठंडी, अंधेरी जगह रखें, सूरज की रोशनी से दूर।

ज़्यादातर घरों में जो तेल की खपत होती है, उसमें यह समय-सीमा कोई दिक्कत नहीं करती। बस उतना ही खरीदें जितना 2–3 महीने में इस्तेमाल हो।

रोज़ के खाने में कैसे इस्तेमाल करें?

कोल्ड प्रेस्ड तेल कोई ‘स्पेशल’ चीज़ नहीं है जो सिर्फ सलाद पर डालनी हो। यह रोज़ के खाने का तेल है, दाल का तड़का, सब्ज़ी बनाना, रोटी सेंकना, कभी-कभी कुछ तलना।

पहली बार इस्तेमाल करने वालों के लिए कोल्ड प्रेस्ड मूंगफली तेल सबसे अच्छी शुरुआत है। इसका स्वाद हल्का है, खाने पर हावी नहीं होता। रिफाइंड तेल से स्विच करने पर फर्क आपको पहले दिन से दिखेगा, खाने में एक गहराई आएगी जो पहले नहीं थी।

हमारा कोल्ड प्रेस्ड मूंगफली तेल पारंपरिक कोल्हू विधि से निकाला जाता है, कोई रसायन नहीं, कोई ब्लीचिंग नहीं।standardcoldpressedoil.com/cold-pressed-groundnut-oil

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