भारतीय खाने के लिए कौन-सा तेल? राज्यवार, व्यंजनवार सच्चा जवाब

अगर आप किसी बंगाली घर में जाएं और कहें कि माछेर झोल बनाने के लिए रिफाइंड सनफ्लावर तेल काफी है, तो आप पर एक अजीब-सी निगाह पड़ेगी। वही अनुभव आपको मिलेगा अगर आप किसी केरल के घर में कहें कि नारियल तेल की जगह मूंगफली तेल से अवियल बनाया जाए।

भारतीय खाना एक नहीं है। यह एक महाद्वीप है जिसमें हर राज्य का, हर ज़िले का, हर मौसम का अपना खाना है। और उस खाने की जड़ें उस तेल में हैं जो उस ज़मीन पर उगता था, जो उस ज़मीन की घाणी पर निकलता था।

यहाँ हम उसी हिसाब से बात करते हैं, कौन-सा तेल, किस खाने के लिए, क्यों।

भारतीय राज्यों और व्यंजनों के अनुसार सही कुकिंग ऑयल चुनने की गाइड
राज्यवार और व्यंजनवार जानिए कौन-सा तेल भारतीय खाना पकाने के लिए सबसे उपयुक्त है।

कोल्ड प्रेस्ड मूंगफली तेल: सबसे versatile, सबसे आसान शुरुआत

अगर आपको एक ही तेल चुनना हो जो सबसे ज़्यादा किस्म के भारतीय खाने के साथ काम करे, तो जवाब है, कोल्ड प्रेस्ड मूंगफली तेल।

इसकी वजह इसकी fatty acid संरचना है: लगभग 46% oleic acid (monounsaturated), 32% linoleic acid (polyunsaturated), 11% palmitic acid (saturated)। यह मिश्रण इसे गर्मी में स्थिर बनाता है। स्मोक पॉइंट 160–180°C है, तड़के से लेकर तलने तक सब में काम करता है।

स्वाद हल्का है, मुलायम है। सब्ज़ी पर हावी नहीं होता। जिन लोगों को सरसों या तिल की तेज़ महक पसंद नहीं या जो नए-नए कोल्ड प्रेस्ड तेल की तरफ आ रहे हैं, उनके लिए मूंगफली तेल सबसे आसान transition है।

किस खाने में बेस्ट है:

  • आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का खाना: गुट्टी वंकाया, गोंगुरा पचड़ी, पुलिहोरा, सब में मूंगफली तेल ही सही तेल है
  • महाराष्ट्र और कर्नाटक के रोज़ के खाने में
  • उत्तर भारत में रोज़ का तड़का और सब्ज़ी बनाने के लिए
  • तलने के लिए, पकौड़े, मठरी, पूरी
देखें: standardcoldpressedoil.com/cold-pressed-groundnut-oil

कोल्ड प्रेस्ड सरसों तेल: उत्तर और पूर्वी भारत की रसोई की जान

सरसों तेल को ‘neutral’ नहीं चाहते। वो चाहते हैं वो तीखापन, वो गंध, वो जो नाक में थोड़ा चढ़े और बताए कि कुछ असली बन रहा है।

बिहार में लिट्टी-चोखा पर जो सरसों तेल डाला जाता है, वो raw, तीखा, कच्ची घाणी वाला होता है। बंगाल में माछेर झोल में सरसों तेल को पहले धुआँ देते हैं (pakrao करते हैं), इससे isothiocyanate यौगिक बदलते हैं और एक गहरा, गोल स्वाद आता है। पंजाब में सरसों का साग सरसों के तेल में ही बनता है, यह कोई संयोग नहीं है।

कोल्ड प्रेस्ड सरसों तेल में allyl isothiocyanate होता है जो ठंडी घाणी में ही बनता है। रिफाइंड सरसों तेल में यह यौगिक नहीं होता, इसीलिए वो हल्का लगता है। अगर आपको लगता है कि सरसों तेल का वो पुराना तेज़ स्वाद अब नहीं रहा, तो असल कारण यह है।

किस खाने में बेस्ट है:

  • बंगाली और ओड़िया खाना: सरसों के बिना माछेर झोल, शोर्षे इलिश, आलू पोस्तो अधूरे हैं
  • बिहारी खाना: लिट्टी-चोखा, तरकारी, अचार
  • पंजाबी खाना: सरसों का साग, अचार का आधार
  • उत्तराखंड और हिमाचल की रसोई
  • कच्चा इस्तेमाल: marination में, सलाद ड्रेसिंग में, अचार बनाने में
देखें: standardcoldpressedoil.com/cold-pressed-mustard-oil

कोल्ड प्रेस्ड तिल तेल (गिंगेली): दक्षिण भारत का रोज़ का तेल

तमिलनाडु, आंध्र, और तेलंगाना के घरों में तिल तेल वो है जो उत्तर में सरसों तेल है, रोज़ का, ज़रूरी, पहचान देने वाला।

लेकिन यहाँ एक बात साफ करना ज़रूरी है: यह तिल तेल, काले तिल से बना गहरा तेल नहीं है जो चीनी खाने में condiment की तरह डाला जाता है। कोल्ड प्रेस्ड white sesame (सफेद तिल) तेल हल्के रंग का, हल्की खुशबू वाला होता है, और यह cooking oil है, condiment नहीं।

तिल तेल की खासियत यह है कि इसमें sesamol, sesamin और sesamolin नाम के natural antioxidants होते हैं जो इसे गर्म करने पर भी स्थिर रखते हैं। यही कारण है कि तमिलनाडु में मुरुक्कू, सेव और वड़ाम गिंगेली तेल में तले जाते हैं, यह तेल लंबे समय तक frying के लिए उपयुक्त है।

तिल चावल (एल्लु सादम), पुलिसेरू, आवियल, ये सब gingelly oil में ही बनते हैं। और पारंपरिक आयुर्वेद में जो ‘अभ्यंग’ (oil massage) होती है, वो भी इसी तिल तेल से।

किस खाने में बेस्ट है:

  • तमिल, आंध्र और तेलंगाना का रोज़ का खाना
  • दक्षिण भारतीय snacks की frying
  • तिल चावल, सांभर में तड़का
  • मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ की तैयारियाँ

कोल्ड प्रेस्ड नारियल तेल: केरल और तटीय भारत का दिल

केरल में नारियल तेल के बिना खाना सोचना ऐसा है जैसे दाल बिना नमक के। अवियल, थोरन, फिश मोइली, ओणम सद्या, हर चीज़ में नारियल तेल है। यह परंपरा नहीं है, यह खाने की पहचान है।

कोल्ड प्रेस्ड नारियल तेल (virgin coconut oil) का स्मोक पॉइंट 175–200°C होता है, जो रिफाइंड तेल जितना नहीं, लेकिन घर के खाने के लिए काफी। इसका fatty acid profile predominantly saturated है (lauric acid, myristic acid) जो इसे गर्मी में स्थिर बनाता है।

24°C से नीचे यह तेल जम जाता है, यह एकदम normal है। यह किसी खराबी की निशानी नहीं, इसकी प्राकृतिक saturated fat composition की निशानी है। थोड़ा गर्म करें, तुरंत पिघल जाता है।

किस खाने में बेस्ट है:

  • केरल का पूरा खाना: अवियल, थोरन, फिश मोइली, पायसम
  • तटीय कर्नाटक और तमिलनाडु का नारियल-आधारित खाना
  • नारियल चटनी, नारियल-आधारित करी
देखें: standardcoldpressedoil.com/cold-pressed-coconut-oil

दो तेलों की रसोई: सबसे व्यावहारिक तरीका

ज़्यादातर भारतीय घरों में दो तेल रखना सबसे practical approach है:

  • एक everyday तेल: कोल्ड प्रेस्ड मूंगफली तेल, रोज़ की सब्ज़ी, दाल, तलने के लिए
  • एक regional/specialty तेल: अपने खाने की परंपरा के हिसाब से, बिहार-बंगाल के लिए सरसों, दक्षिण के लिए तिल, केरल के लिए नारियल

जैसे-जैसे आप इन तेलों से खाना पकाते हैं, आपको अंदाज़ा होता जाएगा कि कौन-सा तेल किस व्यंजन को जीवंत बनाता है। और यही अंदाज़ा असली रसोई का ज्ञान है।

हमारे पास हर रसोई के लिए सही तेल है, कच्ची घाणी से निकाला, बिना रसायन के।standardcoldpressedoil.com/shop

और पढ़ें

  • खाने के तेल का स्मोक पॉइंट क्या होता है [→ ब्लॉग 8]
  • सरसों तेल: भारतीय रसोई में उपयोग और पहचान [→ ब्लॉग 9]
  • तिल तेल: सदियों से दक्षिण भारत की रसोई में क्यों [→ ब्लॉग 10]
Avatar Of Deepak

Deepak

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *